ब्रह्माण्ड की शुरुआत कैसे हुई | The Big Bang – The Biggest Theory in Science

ब्रह्माण्ड की शुरुआत कैसे हुई | The Big Bang – The Biggest Theory in Science

हमारी दुनिया कितनी खूबसूरत है, है ना!!! पर इस दुनिया में सब अपने रोज़ की जिंदगी में व्यस्त रहते है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि ये ब्रह्माण्ड जिसमे आप काफी समय से रह रहे हो। इसकी शुरुआत कैसे हुई ?, जितनी घटनाएं हुई है, उसकी शुरुआत कहा से हुई ? वैज्ञानिकों को ये पता चला कि हमारा ब्रह्माण्ड चारो ओर से फ़ैल रहा है। ये ब्रह्माण्ड हर 1 SECOND SIZE में बढ़ता जा रहा है। तो ये  जानने के लिए कि इस ब्रह्माण्ड की शुरुआत कैसे हुई।
हमें सिर्फ समय को रोकना होगा और पीछे जाना होगा। तो चलिए थोड़ा पीछे चलते है………………कुछ ज्यादा ही पीछे…………….. आज से करीब 13.8 अरब साल पहले

What Is the Big Bang Theory What Is the Big Bang? | NASA Space Place – NASA Science
THE BIG BANG SCIENCE

हमारा अनंत ब्रह्माण्ड, सब कुछ एक परमाणु से भी छोटे से गोले के अंदर समाया हुआ है। इस ब्रह्माण्ड में जो भी होने वाला है, इस ब्रह्माण्ड में जो भी घटने वाला है। सब एक गोले परमाणु में मौजूद है, इस ऊर्जावान गोले के अंदर, यहाँ पर समय का कोई अस्तित्व नहीं है। पर अभी दुनिया जिसे हम जानते है, उन सब की शुरुआत होने वाली है। इसी रहस्य के कारण के चलते एक  ATOM के SIZE से भी छोटा ब्रह्माण्ड अचानक अपने अस्तित्व में आ रहा है।
एक सेकंड के करोरवे हिस्से के अंदर ये ब्रह्माण्ड अपने अस्तित्व में फ़ैल गया। और इसे ही हम कहते है, THE BIG BANG उस समय BLAST हुआ था, वो सब PURE ऊर्जा है। ये ऊर्जा पूरी  तरह से फ़ैल गयी, और इसी समय SPACE का जन्म हुआ। और साथ ही साथ समय अपने अस्तित्व में आया। ये सुद्ध ऊर्जा यानी ENERGY करोड़ों साल तक फैलती रही। और ये ऊर्जा इतने सालों में धीरे-धीरे ठंडी होने लगी। और इसी ऊर्जा के चलते MATTER का FORMATION हुआ, अरबों छोटे छोटे ATOMIC PARTICLES के रूप में, जिसे हम ATOM कहते है। ELECTRONS, PROTONS, NEUTRONS इन सब चीज़ों का FORMATION हुआ।
 
असल में 2 प्रकार की चीज़ें बनी थी। आदि थी MATTER मतलब वो परमाणु और बाकी चीज़ें जिससे ये दुनिया बनी है। जिससे आप बने हो। और दूसरा GROUP था ANTI-MATTER जो MATTER का OPPOSITE यानि उल्टा है। और क्यूंकि ANTI-MATTER, MATTER का विपरीत है। इसीलिए जब वो आपस में मिलते है, तब वो एक दूसरे को ख़त्म कर देते थे। पर FORTUNATELY MATTER < ANTI-MATTER से थोड़ा ज्यादा था। सब खत्म होने के बाद एक MATTER का गोला बच गया था। और उसके विपरीत और कुछ नहीं था। जो उसको ख़त्म कर सके। और इसीलिए वो विस्फोट हो गया। जो कि हम लोगों के लिए बहुत LUCKY था, क्यूंकि इसी एक गोले से अब पूरी दुनिया बनने वाली है। इसी एक MATTER के गोले के चलते, तारों और ग्रहों वाला ब्रह्माण्ड अस्तित्व में आया। शुरू के BIG BANG के चलते ये ब्रह्माण्ड अस्तित्व में आया, और MATTER के इस गोले के इस विस्फोट के चलते ब्रह्माण्ड के अंदर की चीज़ें अस्तित्व में आयी। 
 
उस गोले के ब्लास्ट होने के बाद सब कुछ ठंडा हुआ। और आखिर में जाकर सब कुछ बनना शुरू हुआ। धुल जैसे दिखने वाले इस ब्रह्माण्ड में एक FORCE अपना काम करने लगा। उस FORCE के चलते हर एक ATOM आपस में जुड़ने लगे, एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगे। और ये FORCE कोई और फाॅर्स नहीं, ये है FORCE OF GRAVITY यानी गुरुत्वाकर्षण बल, शुरुआत में इस ब्रह्माण्ड में ज्यादातर HYDROGEN के ATOMS EXIST करते थे। गुरुत्वाकर्षण बल जगह-जगह उस हाइड्रोजन के परमाणु को आपस में COMPRESS करने लगे। जिस जगह HYDROGEN के परमाणु गुर्त्वाकर्षण बल के चलते सामने आते थे, उस जगह का तापमान लाखों डिग्री तक पहुँच जाता था। COMPRESS होते-होते एक जगह का TEMPERATURE एक करोड़ डिग्रीज तक पहुँच गयी। तब एक प्रक्रिया शुरू हो गयी। जिसे NUCLEAR FUSION कहते है। उससे बहुत ही ज्यादा ENERGY निकली, उस समय कुछ ऐसा हुआ कि उस ब्रह्माण्ड का पहला तारा अस्तित्व में आया। फिर इस तारे को अपना एक दोस्त मिल गया और फिर इसी प्रक्रिया से शुरुआत में 200, 300 तारे बने, लाखों सालों अंतराल में करोड़ों तारे अस्तित्व  आ गए। जी हाँ ये वहीं तारें हैं, जिन्हे आप आसमान में देखते हो। वो ब्रह्माण्ड की शुरुआत में इसी तरह बने थे।
 
धीरे-धीरे ये तारे गुरुत्वाकर्षण बल के चलते सामने आने लगे, वो आपस में एक GROUP में रहने लगे। और अरबों तारों का समूह इस ब्रह्माण्ड में दिखने लगा। और अलग-अलग GROUP SHAPE और SIZE का FORMATION हुआ। और उसी नज़ारे को हम GALAXY कहते हैं। इसी तरह लाखों करोड़ों और अरबों GALAXIES यानी आकाशगंगा का जन्म हुआ। और इन्ही के GALAXIES के समुन्द्र में कहीं बीच में एक ऐसी GALAXY बनी, और इस GALAXY का नाम है THE MILKY WAY यानी वो GALAXY जिसमे हम और आप मौजूद है। इस GALAXY के अंदर खरबों तारे मौजूद थे, पर कुछ DUST अभी भी बचा हुआ था, जो की SPACE में तैर रहा था। पर हजारों साल के अंतराल में GRAVITY अपनी POWER दिखाने लगी, जो DUST मौजूद थी, वो भी गुरुत्वाकर्षण बल के चलते आपस में सामने आने लगी। और इसी परिस्थिति के बीच में बहुत सारे PLANETS यानी ग्रह बनने लगे। सारे ASTEROID जैसे दिखने वाले टुकड़े GRAVITY के चलते आपस में मिलने लगे। और इन्ही ग्रहों के बनने के दौरान एक रॉकी PLANET भी बनने लगा। यानी ऐसा गृह जिसका सतह SOLID था। और किसे पता था, कि इसका नाम होने वाला है EARTH यानी धरती, जिसमे आपका और मेरा जन्म होने वाला है। 
 
SOLID टुकड़े आपस में जुड़कर PLANET तो बन गए। पर जो बचे-कूचे PURE HYDROGEN के ATOMS थे। वो भी आपस में मिलने लगे। और जैसा की मैंने तारे के निर्माण के बारे में बताया था। बिलकुल वही घटना यहाँ भी हुई। कुछ बचे हुए HYDROGEN के ATOMS से एक छोटा सा तारा बनने लगा। सारे HYDROGEN आपस में करीब आने लगे, और इतनी TEMPERATURE बढ़ गयी, कि NUCLEAR FUSION की शुरुआत हो गयी। एक नया तारा जिसका नाम है सूरज, उसका जन्म हो गया, जब ये सूरज बना, तब ये एक बहुत ही तेज SOLAR WIND को ERUPT किया, जिसका चलते बाकी सारे धुल के कण SOLAR SYSTEM यानी सौरमंडल के बाहर चके गए। और सौरमंडल में वही बाकी 8 ग्रह और बाकी उपग्रह बच गए। जो कि SIZE में बड़ी थी। और सौरमंडल वैसा दिखने लगा जैसा वो अभी दीखता है।
 
SOLAR SYSTEM के बाहरी तरफ बहुत सारे गैस के PLANETS बन चुके थे। जैसे  : JUPITER यानी बृहस्पति, SATURN यानी शनि ग्रह, URANUS यानी अरुणग्रह, और NEPTUNE यानी वरुणग्रह। और SOLAR SYSTEM के अंदर के तरफ इन रॉकी PLANETS का जन्म हो गया था। यानी ठोस सतह वाले ग्रह, जैसे MERCURY यानी बुद्धग्रह, VENUS यानी शुक्रग्रह, MARS यानी मंगलग्रह, और आखिर में हमारी प्यारी से धरती जिसे हम EARTH भी कहते है। और यही वो धरती है, जिसके इतने बड़े सतह पर से एक जगह पर बैठकर आप इस वीडियो को देख रहे हो। आपके जन्म से पहले इस ब्रह्माण्ड में इतना कुछ घट चूका है। BIG BANG से जन्मा वो MATTER, और इस MATTER से जन्मा ये तारा, और इस तारों के बाद इन ग्रहों की उत्पत्ति, और इसी के चलते आपका जन्म हुआ। यही थी आपके और आपके पहले की कहानी,  ये जानकारी आपको कैसा लगा नीचे कमेंट करके जरूर बताना और इसे शेयर भी जरूर करना। 
 
आपका कीमती समय देने के लिए धन्यवाद। 

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