मुग़ल और उनके साम्राज्य के बारे में 10 आश्चर्यजनक रोचक तथ्य

सन 1526-1857 तक भारतीय उप महाद्वीप पर मुग़लों ने शाशन किया था। मुग़ल वंश की शुरुआत करने वाला और पहला मुग़ल बादशाह बाबर था। जो Uzbekistan
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से भारत आया था। आगे चलकर इस वंश में जहाँगीर, अकबर, शाहजहाँ और औरंगजेब जैसे बादशाह हुए। तो दोस्तो आज आप मुग़लों के बारे में 10 ऐसे तथ्यों को जानोगे। जिसको पढ़ने के बाद वाकई में ये बाते आपको हैरान कर देंगे।

1. मुग़लकाल मे अपराधी को मृत्युदंड देने का जो आम तरीका था, वो बड़ा ही भयानक था। अगर किसी को मौत की सजा सुनाई जाती थी तो, उसको जमीन पर लेटा दिया जाता था। और हाथी अपने पैरों से उसका सीना तोड़ देता था, या फिर उसका सिर कुचल दिया करता था।
 
2. कोहिनूर के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे। पर आज में आपको उससे भी बहुमूल्य चीज़ के बारे में बताता हूँ, जो कभी हमारे हिंदुस्तान में हुआ करती थी। और जिसके बारे में आजकल बहुत कम लोग ही जानते होंगे। तख्त-ए-ताउस जो कि हीरे जवाहरातों से जरा एक वेशकीमती सिंघासन था। इसको बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था। इसमे ठोस सोने के छह पाए थे। इसमे जवाहरात, मोतियों और नीलम से जड़े दो मोर थे। 
 
ताउस शब्द अरबी भासा का शब्द है, जिसका मतलब मोर होता है। इसलिए इसको मयूर सिंघासन भी कहा जाता था। तख्त-ए-ताउस की कीमत 17वी सदी में भी करोड़ों में थी। और इसे बनाने में 7 साल लगे थे। सारा सिंघासन वेशकीमती रत्नों, मोतियों और सोने का बना हुआ था। और इसे खास मौकों पर ही बादशाह के दरबार मे लाया जाता था। तख्त-ए-ताउस पहले आगरा के किले में था। बाद में इसे दिल्ली के लाल किले में लाया गया था। इतिहास में ऐसा अद्भुत तख्त न तो शाहजहाँ से इससे पहले… और ना ही उसके बाद किसी राजा महाराजा ने बनवाया था। ईरान के बादशाह नादिर शाह ने जब दिल्ली पर हमला किया। तो सारी धन दौलत को लूटने के साथ साथ वो तख्त-ए-ताउस को भी अपने साथ ईरान ले गया था। सन 1747 में नादिर शाह की हत्या हो गयी थी। और इसके बाद ये सिंघासन अचानक गायब हो गया। तब से लेकर आज तक इसका कोई अता-पता नही है, की ये कहा गया ? किसने लिया ? समय समय पर सरकार इसका पता लगाने की कोशिश करती रही है।
 
3. किसी जमाने मे दुनिया का वेशकीमती हीरा कोहिनूर शाहजहाँ के तख्त-ए-ताउस पर जरा हुआ था। कोहिनूर के बारे में ये कहा जाता था। की जो इस हीरे का मालिक है, वही पूरी दुनिया का मालिक है। उस जमाने मे कोहिनूर की कीमत इतनी थी। की उसे बेचकर पूरी दुनिया को ढाई दिनों तक खाना खिलाया जा सकता था। सन 1739 तक ये हीरा मुग़लों के पास था। ईरान का बादशाह नादिर शाह धोखे से मुग़ल बादशाह मुग़ल शाह से पगड़ी बदलकर उसी के साथ कोहिनूर को भी चुरा ले गया। ये हीरा मुग़ल बादशाहो ओर ईरानी बादशाहो से होता हुआ अंत मे अंग्रेजो के पास में चला गया। और आज भी उन्ही के पास है।
 
4. अकबर की सबसे बड़ी कामयाबी थी, उसका बसाया गया बहुत बड़ा शहर फतेहपुर सीकरी जिसे पहाड़ी पर बसाया गया था। जहाँ पहले कोई भी बस्ती नही थी। सन 1584 में एक इंग्लिश यात्री रॉल्फ फिच भारत आया था। जिसने लिखा था कि फतेहपुर सीकरी लंदन से भी बड़ा शहर है। अकबर एक कामयाब बादशाह होने के साथ साथ कलाप्रेमी भी था। इस शहर का निर्माण अकबर ने अपनी देख-रेख और निगरानी में करवाया था। और अकबर ने खुद इसका नक्शा बनवाने में मदद की थी। पहले मुग़ल साम्राज्य की राजधानी आगरा थी। फतेहपुर सीकरी को अकबर ने नई राजधानी बनाया था। फतेहपुर सीकरी 1570 से लेकर 1585 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा था। पर पानी की कमी की वजह से सिर्फ 15 साल में ही इस शहर को छोर दिया गया था। और राजधानी को फिर से आगरा ले जाया गया था। इतिहास में ऐसा पहले कभी नही हुआ था, की एक के सपनो से इतना बड़ा शहर बसाया गया हो, और उसे 15 साल में वीरान भी कर दिया गया हो।
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BAADSHAH AKBAR


5. दुनिया का सबसे बड़ा दरवाज़ा बादशाह अकबर ने बनवाया था। आगरा से 36 किलोमीटर दूर फतेहपुर सीकरी में मौजूद बुलंद दरवाज़ा दुनिया का सबसे बड़ा प्रवेश द्वार है। बुलंद शब्द का अर्थ होता है। महान या ऊंचा ! इस दरवाज़े को अकबर ने सन 1601 में बनवाया था, ये 177 फुट ऊंचा है।

 
6. हुमायूँ जो कि बाबर का बेटा था। और दूसरा मुग़ल बादशाह बना था। वो अफीम का बड़ा शौकीन था। अफीम ही उसकी मौत की वजह बनी थी। एक दिन जब वो नशे मे और अफीम के प्रभाव में था, तो लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिरकर उसकी मृत्यु हो गयी थी।
 
7. अकबर सभी धर्मों का सम्मान करता था। उसने आपसी एकता को बढ़ावा दिया था। उसके शासन के दौरान राजदरबार में हिन्दुओ को ऊंची पदवियाँ मिलती थी। उससे पहले के बादशाहो द्वारा हिन्दुओ पर लगाया जाने वाला जजिया कर उसने हटवा दिया था। उन्होंने राजपूत रानी जोधा से शादी की थी। लेकिन उन्होंने कभी उनको मुसलमान नही बनाया। यहाँ तक कि रानी जोधा बाई के लिए फतेहपुर सीकरी में उसने मंदिर भी बनवाया। 1582 में अकबर ने एक नया धर्म बनाया था। जिसका नाम था दिन-ए-इलाही इसमे अकबर ने सभी धर्मों की मूल बातों को मिला दिया था। जिसमे प्रमुख धर्म थे हिन्दू, इस्लाम, ईसाई, जैन और पारसी। अकबर ने खुद भी इस धर्म को अपनाया था। लेकिन इस धर्म को ज्यादा प्रसिद्धि नही मिली थी। और अकबर के अलावा बीरबल ही इसका अनुयायी रहा था। और अकबर के बाद सिर्फ 19 लोगों ने इसे अपनाया था।
 
8. सभी मुग़ल बादशाहो में सिर्फ औरंगजेब ही अकेला ऐसा बादशाह था। जो अपने इस्लामिक नियमों के चलते शराब नही पीता था, लेकिन साथ ही उसे मुग़ल इतिहास का सबसे क्रूर बादशाह भी माना जाता है। गैर मुस्लिमों पर लगने वाले जिस जजिया कर को अकबर ने खत्म कर दिया था। उसे औरंगज़ेब ने फिर से लागू करवाया था। यहाँ तक कि औरंगज़ेब ने अपने तीन भाइयों को भी मौत के घाट उतार दिया था। उस समय के कवियों ने भी अपनी रचनाओं में औरंगज़ेब के अत्याचारों का भी ज़िक्र किया है।
 
9. कहा जाता है की हुक्का मुग़ल काल की रचना है। सोलहवी सदी में Europeons तंबाकू को भारत लेकर आये थे। और उसके बाद फतेहपुर सीकरी में अकबर के एक ईरानी डॉक्टर अबूल फतेह गिलानी ने हुक्के की खोज की थी।
 
10. मुग़ल सल्तनत की नींव रखने वाला बाबर एक पैदाइशी योद्धा था। वो अपने पिता की ओर से तैमूर लंक का पांचवा वंशज था। और अपनी माँ की तरफ़ से चंगेज़ खान का चौदहवाँ वंशज था। जब वो 12 साल का था, तो उसे विरासत में फ्रर्गना शहर मिला था। और वो वहाँ का बादशाह बना था। और इसके 2 साल बाद जब वो 14 साल का हुआ। तो उसने उज़्बेकिस्तान के शहर समरकंद पर हमला करके उसपर कब्ज़ा कर लिया था। सन 1505 तक वो कई जंग लड़ चुका था। तब उसकी उम्र सिर्फ 22 साल थी। अब उसकी नज़र भारत पर थी। अगले 20 साल तक बाबर भारत पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता रहा, पर वो नाकामयाब हो गया था। और फिर सन 1526 में उसने दिल्ली को निशाना बनाया था। उस वक़्त दिल्ली पर इब्राहिम लोदी का राज था। बाबर को लगा कि अगर वो इब्राहिम लोदी को गद्दी से हटा देगा, तो वो वहाँ पर भी कब्ज़ा जमा पायेगा। लोदी की सेना में एक लाख जवान थे। और बाबर के पास सिर्फ बारह हजार थे, मगर बाबर की सेना बेहद खतरनाक बंजारे लड़ाकों की थी। उनमे गज़ब का भाईचारा था। बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच दिल्ली से 40 किलोमीटर दूर पानीपथ में युद्ध हुआ। बाबर को युद्ध रणनीति बनाने में महारथ हासिल थी। उसने ऐसा जाल बिछा रखा था, की मानो लोदी का शिकार करने वाला हो।

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BABUR


20 अप्रैल 1526 शुक्रवार की सुबह थी, और उस दिन इब्राहिम लोदी उसके जाल में फस गया, लोदी के 1 लाख जवान, और 1 हज़ार हाथी, बाबर के बिछाए फंदे की ओर चल पड़े। उसने लोदी की सेना को उस मौत के घेरे के अंदर घेर लिया। जहाँ से उनके पास भागने का कोई रास्ता नही था। बाबर के जवानों ने लोदी की सेना पर हमला करना शुरू किया। उसकी तोपों ने लोदी के हाथियों को बेकाबू कर दिया। जिससे वो अपने ही सेना के जवानों को कुचलने लगे, इससे चारों तरफ़ ऑफर-तफरी मच गई थी। और तब बाबर के तीरंदाजो ने चारों तरफ से तीरों की बौछार कर दी थी।

अब बाबर जीत गया था। और उसने इब्राहिम लोदी को मौत के घाट उतार दिया था।
 
बाबर को लोग एक लड़ाके और बादशाह के तौर पर तो जानते ही है, लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि वह एक ऊँचकोटि का लेखक भी था।
 
उम्मीद करता हूँ आपको मुग़ल साम्राज्य से जुड़े ये तथ्य आपको पसंद आये होंगे।
 
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आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।

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